था तेरा सर्वस्व मैं
बन गया हूँ अब गैर
मिल गया नया दोस्त जो
दुश्मन हो गया हूँ मैं
मेरे दोस्त ।
नया खिलौना मिलता तो
बच्चा पुराना फेंक देता जो
खिलौना तो नहीं हूँ मैं
बेजान-सा, मूक-सा
सजीव हूँ, सचेत हूँ
सबल हूँ, सफल भी हूँ।।
खैर, क्या खिलौना रोता है, बच्चे की अनदेखी पर ?
मैं भी न रोऊँगा, तेरी इस नासमझी पर
समझूँगा यही कि यह मौका है
तुझे जानने का, खुद को पहचानने का
शुक्र है मेरे दोस्त,
जीवन की नश्वरता जो
तूने समझा दी मुझे

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