शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

ईश्वर की चाह


ईश्वर नहीं चाहता

पूजा पाठ का रस्म

वह नहीं चाहता

फल फूल की चढाई

पालकी रथ की सवारी

धन और दान का आडंबर

क्या चाहता है वह,

अपनी सर्वोत्तम सृष्टि से ?

वह चाहता है कि

मानव प्रकृति को नष्ट करें

अन्य जीवों पर दुष्ट बनें

संसार में प्रेम और शांति बने रहें

मानव देव सही,

मानव बनकर जिएँ, जीने दें ।।

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