शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

प्यार की पुकार


दिल की बात दिल में रहने दो

मुँह पै जो गई तो तूफान मचा देगी !

दिन में रात दिखाएगी और रात में दिन !!

मूख सारी दुनिया करा देगी, करा देगी बेचैन !!

ऐसी क्या बात है प्यारे ? जो बतियाते बरस पडे !

पूछ लिया अपने दिल से, दिल की बात !

कह डाला दिल,  कुछ सिमटकर, कुछ संभलकर,

दुनिया के हर रस्ते में खडा है प्यार

अपना दामन बिछाकर, स्नेह का भीख माँगकर,

प्यार से पूछा -- ``तुम खुद प्यार हो

स्नेह क्यों माँग रहे हो किसी से ?``

प्यार बोला - ``मैं प्यार हूँ, पर वो प्यार नहीं

जो मानव के मन में नाम मात्र बस गया हो,

जो पैसे और अधिकार को देखकर

रंग बदलता हो, बह निकलता हो

मैं वो प्यार हूँ जिसे महानों ने अपनाया था

बुद्ध, गाँधी, महावीर ने पनपाया था

मैं वो प्यार हूँ जिसे पाकर

मानव अमर बन जाता है

वर्षा की बूँद की तरह हूँ कि

मैं भेदभाव नहीं देखता

बस मैं अब तडपता हूँ

एक मासूम दिल के लिए

एक स्नेह भरे दिल के लिए

जो मुझे समझे, पहचाने और

पूर्ण रूप से अपनाए

हे मानव तुम तो कोशिश करो

मुझे  आत्मसात करने की

देखो फिर तुमको क्या से क्या बना दूँ मैं !

मैं सर्वसंपन्न हूँ,

मुझे पाकर तुम

संपूर्ण बन जाओगे

जरूरत होगी जल, थल, वायु सेना की

नाइट्रोजन, परमाणु बमों की,

अस्त्रों की, शस्त्रों की, राकेटों की

ही जरूरत होगी पर्यावरण को बचाने की !

ये सब संभव है, पर एक शर्त है

कहो तैयार हो उसे सुनने ?``

दिल ने कहा --``हाँ, बताओ अपना शर्त !

प्यार कहने लगा -``शर्त है कि

तुम मुझे अपने में कैद नहीं रखोगे

जितना हो सके

मुझे लुटाओगे,

भेद नहीं रखोगे

दूसरों से मुझे पाने की आशा होने पर भी

दूसरों पर मेरा बौछार करोगे``

पूछ उठा दिल - ``इसमें मेरा क्या फायदा होगा?``

प्यार ने कहा - ``एक बार मुझे अपनाके देखो तो सही!

दुनिया की हर खुशी

तुम्हारे दामन में होगी

शांति तुम्हारी सेवा करेगी

और समृद्धि तुम्हारा पालन !!``

दिल ने कहा ``ये सौदा अच्छा है, चलो आजमाते हैं ``

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