शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

मेरी पहली कविता


लिखने बैठी मैं कविता..

अपनी पहली कविता.....

क्या लिखूँ ?

किस पर लिखूँ ?

सोच आयी मन में

प्रकृति पर लिखूँ ?!

ज्ञान पर ?! या विज्ञान पर?!

सोच सोच में बैठी रही

लिखने अपनी पहली कविता !!

अचानक मेरी कलम चलने लगी कागज पर

देखा तो ----

कागज पर था पहला शब्द ``माँ``

प्यार और अमूल्य त्याग की मूर्तिमान माँ

मन में उत्साह और उमंग की तरंगे भर पडीं

पर शब्द नहीं है

इस मानव रूपी देवी की गुणगान के लिए

शत शत प्रणाम माँ ...मेरी कविता हो तुम ।।

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