शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

अफसर बनना है ?!


प्रयत्न करते हैं सब अफ्सर बनने का

पर क्या सब बन पाते हैं अफ्सर ?

कई कोशिशों बाद भी कुछ रह जाते हैं

जहाँ के तहाँ, उठ नहीं पाते हैं ऊपर

क्या वजह है इसकी कि कुछ आगे निकल पाते हैं

और कुछ पीछे ही रह जाते हैं

वजह कुछ भी हो, आगे या पीछे का क्या मर्म है ?

धन, दौलत, नाम, धाम या और कुछ है

अगर धन-दौलत है तो उसका कोई अंत नहीं

रंक कुछ पैसों से खुश है और

राजा कुछ करोड़ों से भी नाखुश

अगर नाम-धाम है तो उसका कोई मतलब नहीं

नाम सदाचार से बनता है, और धाम  दान से

तो मानव! छोडो इन आगे पीछे की आँख मिछौनी को

बढो जीवन में हर पल मन से, मानवता से

सह जीवों पर प्यार बढाओ, मन के भेद मिठाओ

सब की खुशहाली चाहो, सब पर खुशी भरसा दो

स्वतंत्रता का नया पैगाम तलाशो, मन के जंजीर तोडो

प्यार से भरा दो दुनिया को, प्यार ही प्यार बहा दो ।।

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